Micro-irrigation: The Way Ahead For Sustainable Agriculture

Micro-irrigation: The Way Ahead For Sustainable Agriculture

भारत पानी की कमी और जनसंख्या विस्फोट की दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। चल रहे जल संकट ने लगभग 500 मिलियन लोगों को प्रभावित किया है और इसके और खराब होने की आशंका है। 2050 तक देश की आबादी बढ़कर 1.6 अरब हो जाएगी।

भारत में कृषि क्षेत्र पानी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है या देश के पीने लायक पानी  का लगभग 90% हिस्सा कृषि क्षेत्र में प्रयोग हो जाता है | प्रति व्यक्ति पानी की खपत 7611000 बिलियन लीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 4913 से 5800 किमी है।

जलवायु परिवर्तन ने पानी की कमी की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है: इसका प्रभाव मौसम के मिजाज पर पड़ता है। जो  हमारे कृषक समुदाय की आजीविका और कल्याण को प्रभावित कर सकता है |

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव भारतीय कृषि में बहुत अधिक प्रभावशाली है | जहाँ लगभग 85% किसान छोटे और सीमांत हैं और 60% किसान मानसून की अनिश्चितता पर निर्भर रहते  हैं, इसलिए सिंचाई की भूमिका बहुत बढ़ जाती है।

किसान आत्महत्या के मुद्दे से जब संसद हिल गई, तो आधुनिक  सिंचाई  प्रणालियों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव पारित हुआ। और कृषि स्थिरता और पर्यावरणीय गुणवत्ता के साथ-साथ किसानों की आय को दोगुना करने की प्रक्रिया के महत्व और संभावित लाभों को समझते हुए, केंद्र सरकार ने प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना या "अधिक फसल प्रति बूंद" नामक एक व्यापक कार्यक्रम की शुरुवात की ।

सूक्ष्म सिंचाई से पैदावार बढ़ सकती है और पानी, उर्वरक और श्रम की आवश्यकता कम हो सकती है। पानी को सीधे जड़ क्षेत्र में लगाने से, गहरे रिसाव और वाष्पीकरण में कमी लाने से  पानी के नुकसान को कम किया जा सकता है । सूक्ष्म सिंचाई से जल-बचत दृष्टिकोण के माध्यम से लगभग 75 से 95% पानी की बचत होती है ।

वी.के वर्षा सिंचाई प्रणाली सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का सबसे अच्छा उदाहरण है

वी.के. वर्षा सिंचाई प्रणाली सिंचाई लगभग 85-90 प्रतिशत की जल उपयोग दक्षता के साथ सबसे प्रभावी तरीका  है।

वी. रेन इरीगेशन सिस्टम  rain pipe मिट्टी को सर्वोत्तम नमी देने में लाभप्रद है|  जो की  उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने में मदद करता है। विभिन्न अध्ययनों में, यह पाया गया है कि वर्षा सिंचाई प्रणाली को अपनाने से फलों के साथ-साथ सब्जियों की फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी सहायक है  ।

फल फसलों की उत्पादकता में 42.3 प्रतिशत और सब्जियों की फसलों की उत्पादकता में 52.8 प्रतिशत की वृद्धि पायी गयी है , सिंचाई की लागत में औसतन 31.9 प्रतिशत की कमी आई।