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चन्दन की खेती करने से क्या फायदा होगा और चन्दन की खेती का लाइसेंस कहा से मिलेगा?

सवाल अच्छा है |

चन्दन ,महोगनी ,सागवान की खेती लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है |

कहावत भी है ——दादा लगाता है और पोते मौज करते हैं|

एक एकड़ मैं भी चन्दन के पौधे लगाने की सोच रहा हूँ इसलिए ये जानकारी इकठ्ठी की थी जो आपके साथ साझा कर रहा हूँ |

 

मात्र एक एकड़ खेत में चार करोड़ अस्सी लाख रुपए तक की मोटी कमाई कराने वाली सफेद चंदन की खेती किसानों के लिए कामधेनु साबित हो रही है। इसकी खास तरह की खुशबू और इसके औषधीय गुणों के कारण भी इसकी पूरी दुनिया में भारी डिमांड है। इसकी एक किलो लकड़ी दस हजार रुपए तक में बिक रही है। इसी एक किलो लकड़ी की कीमत विदेशों में तो बीस से पचीस हजार रुपए तक है। गोरखपुर के किसान अविनाश कुमार का कहना है कि आने वाले कुछ वर्षों में सफेद चंदन का भाव आसमान छू सकता है।

 

 

अनेक दवाइयों में उपयोग एवं निरंतर घटती उपज के कारण इसकी मांग बढ़ रही है। इसकी विदेशों में भी निरंतर मांग है।

चंदन की खेती में सबसे मोटी कमाई है। मात्र अस्सी हजार से एक लाख रुपए लगाकर 60 लाख रुपए तक का मुनाफा हो रहा है।

अविनाश खेतों में लीक से हटकर कम लागत में ज्यादा मुनाफा ले रहे हैं। इस खेती में उन्होंने अपने साथ और भी किसानों को शामिल कर लिया है। मधुबनी (बिहार) के अविनाश पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद खेती-किसानी में लग गए हैं।

बेंगलुरु के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च (आईआईएचआर) के वैज्ञानिकों ने उनको कई औषधीय पौधों की खेती के बारे में प्रशिक्षित किया है। सबसे पहले उन्होंने अपने दो एकड़ खेत में औषधीय फसल ब्राह्मी से ऐसी किसानी की शुरुआत की। बेचने पर सात कुंतल ब्राह्मी के अठारह हजार रुपए मिल गए। इसके बाद वह तुलसी, आंवला, कौंच, बच और शालपर्णी की भी खेती करने लगे। आज मधुबनी के अपने छौरही गांव में उनके खेत पर अर्जुन के पांच हजार पौधे लहलहा रहे हैं। पिछले साल उन्होंने दवा कंपनियों को अपनी औषधीय फसलें बेचकर बीस लाख रुपए कमाए हैं। वह विश्व बाजार में सक्रिय हैं। ऑस्ट्रेलिया तक से खरीददार उनके यहां आ रहे हैं।

सफेद चंदन किसानों के लिए धनवर्षा करने वाली कामधेनु साबित हो रहा है। मात्र एक लाख रुपए की लागत से साठ लाख रुपए तक की कमाई हो रही है। इसकी लकड़ी दस हजार रुपए किलो बिक रही है। पूरी दुनिया की दवा एवं सौंदर्य प्रसाधन निर्माता कंपनियों में भारी डिमांड के कारण इसका भाव आसमान छू रहा है।

 

सफेद चंदन का पेड़ पहाड़ी और रेगिस्तानी प्रदेशों में भी लगाया जा सकता है। राजस्थान के छीपाबड़ौद के किसान नवलकिशोर अहीर ने चंदन की खेती कर ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे कृषि विभाग भी हैरत में है।

लगभग एक साल पहले नवलकिशोर ने चंदन के 351 पौधे झालवाड़ नर्सरी के जरिए कर्नाटक से मंगवाए थे, जिसमें से कुछ पौधे नष्ट हो गए और बाकी बचे हुए पौधों की लंबाई अब दिनों दिन बढ़ रही है।

यह उसकी मेहनत और पत्नी के साथ का ही नतीजा था कि आज उनके पौधों की लंबाई छह इंच से बढ़कर पांच फीट हो गई है। गौरतलब है कि सफेद चंदन सदाबहार पेड़ है। इससे निकलने वाला तेल और लकड़ी दोनों ही औषधियां बनाने के काम आती हैं।

इसके अर्क को खान-पान में फ्लेवर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। साबुन, कॉस्मेटिक्स और पर्फ्यूम सफेद चंदन के तेल को खुशबू के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

 

अमूमन लोगों को लगता है कि चंदन की खेती अवैध है, जबकि ऐसा नहीं है।

केरल, कर्नाटक चंदन उत्पादन में अग्रणी

देश में चंदन की खेती के मुख्य राज्य केरल एवं कर्नाटक हैं। लेकिन अब अन्य राज्यों में भी इसके ट्रायल हो रहे हैं। केरल में चंदन का ऑयल कंटेंट चार फीसदी और कर्नाटक में तीन फीसदी है, जबकि इसके बाद पंजाब में 2.80 से तीन फीसदी, ओडिशा में ढाई फीसदी, महाराष्ट्र में दो फीसदी, मध्यप्रदेश में डेढ़ फीसदी और राजस्थान में डेढ़ फीसदी तक है।

स्पष्ट है कि पंजाब में चंदन की खेती की अपार संभावनाएं हैं और सूबा इसमें अग्रणी बन सकता है। चंदन की व्यावसायिक खेती कर पंजाब में भी ऑयल कंटेंट तीन फीसदी तक आसानी से लाया जा सकता है। रूटीन फसलें पैदा करने के साथ-साथ किसान अपने खेत के चारों तरफ की बट पर भी प्रति एकड़ अस्सी पेड़ लगाकर आमदनी बढ़ा सकता है।

चंदन के पौधे और चंदन की लकड़ी सफेद चंदन का पेड़ पहाड़ी और रेगिस्तानी प्रदेशों में भी लगाया जा सकता है। राजस्थान के छीपाबड़ौद के किसान नवलकिशोर अहीर ने चंदन की खेती कर ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे कृषि विभाग भी हैरत में है।

चन्दन की खेती के लिए कैसी मिट्टी की जरुरत है ?

इसकी खेती सभी तरह की मिटटी में हो सकता है लेकिन रेतीली मिटटी, चकनी मिटटी, लाल मिटटी , काली दानेदार मिट्टी चन्दन के पौधे की लिए ज्यादा उपयुक्त है | चन्दन की खेती वैसे जगह पर नहीं करे जहाँ पर पानी का जमाव होता है , बर्फ गिरती है, रेत भरी मिटटी है इसके अलवा तीव्र ठंड चन्दन के लिए उपयुक्त नहीं है | इसकी खेती काश्मीर के लाद्दक तथा राजस्थान के जैसलमेर में नहीं किया जा सकता है | बाकि पुरे देश में चन्दन की खेती की जा सकती है |

चन्दन की खेती कैसे करें ?

खेती के लिए मिट्टी के साथ पौधे का चुनाव करना महत्वपूर्ण रहता है | सफ़ेद चन्दन की 375 पौधे एक एकड़ खेत में लगाया जा सकता है | चन्दन की पौधों में ज्यादा पानी नहीं लगना चाहिए इसके लिए खेत में मेड बनाकर रोपाई करना चाहिए | इसके लिए मेड से मेड की दुरी 10 फुट होना चाहिए तथा मेड के ऊपर पौधे से पौधे की दुरी 12 फुट की होनी चाहिए |

पौधे कैसे लगायें

चन्दन की पेड़ अकेले नही लगाया जा सकता है अगर अकेले चन्दन का पेड़ लगाया गया तो यह सुख जयेगा | इसका कारण यह है की चन्दन अर्धपरजीवी पौधा है | मतलब आधा जीवन के लिए जरूरत खुद पूरा करता है तो आधे जरूरत के लिए दुसरे पौधे की जड़ों पर निर्भर रहता है इसलिए जब भी चन्दन की पेड़ लगाएं तो उसके साथ और भी पेड़ लगाएं |

 

एक बात का ख्याल रखना होगा की चन्दन के कुछ खास पौधे उसके साथ है जिसे लगाने पर ही चन्दन का विकास सम्भव है | जैसे – नीम, मीठी नीम, सहजन, लाल चंदा इत्यादी |

जैसा की पहले बताया जा चूका है की चन्दन की पौधे अकेले जीवित नही रह सकता है | इसके लिए दुसरे पेड़ का होना जरुरी है |

इसलिए एक एकड़ में 375 सफ़ेद चन्दन के पौधे लगाने के साथ ही 1125 चन्दन की होस्ट (साथी) पौधे को लगाना होगा | इसके लिए यह जानना जरुरी है की चन्दन की पोधे के साथ कौन – कौन से पौधे लगाना होगा यानि चन्दन की कौन – कौन सी पौधे साथी है |

एक एकड़ में चन्दन की पौधे के साथ उसके साथी पौधे को बोना चाहिए |

1-प्राथमिक साथी – 375

2-लाल चन्दन – 125

3- कैजुराइना – 125

4- देसी नीम – 125

5- सेकेंडरी होस्ट – 750

6- मीठी नीम – 375

7-सहजन – 375

खेती के लिए पौधे कहाँ से खरीदें ?

चन्दन की खेती के लिए बीज तथा पौधे दोनों खरीदे जा सकते हैं | इसके लिए केंद्र सरकार की लकड़ी विज्ञान तथा तकनीक संस्थान (institute of wood science & technology) बेंगलोर में है | यहाँ से आप चन्दन की पौधे प्राप्त कर सकते हैं |

चंदन की खेती अवैध नहीं है।

इसकी खेती करने वाले किसानों में एक भ्रांतियां रहती है की इसकी खेती करने के लिए सरकार से लाईसेंस लेने की जरुरत पड़ती है | किसान समाधान आप सभी किसान को आश्वस्त करना चाहता है की चन्दन की खेती के लिए किसी भी तरह का कोई लाईसेंस लेने की जरूरत नहीं है | केवल पेड़ की कटाई के समय राज्य वन विभग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा जो आसानी से मिल जाता है और यह सभी तरह के पौधे में काटने से पहले लेना होता है |

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